Chapter 50

जन्मसँ मृत्युतक

Quick Answer

एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे जीबन आ मृत्यु परस्पर जुड़ल अछि। दस भागमे सँ तीन भाग जीबित रहैछ, तीन भाग मरि जाइछ, आ तीन भाग स्वयं के मृत्यु क्षेत्रमे ले जाइछ। जे सच्चा जीबनके कला जानैछ, ओ हिंसासँ दूर रहैछ।

Key Concepts

  • 生死
  • 摄生
  • 无死地

Cite This Chapter

Laozi, Tao Te Ching, Chapter 50, "जन्मसँ मृत्युतक", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mai/chapters/50/

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出生入死。生之徒十有三,死之徒十有三,人之生动之死地亦十有三。夫何故?以其生生之厚。
盖闻善摄生者,陆行不遇兕虎,入军不被甲兵。兕无所投其角,虎无所措其爪,兵无所容其刃。夫何故?以其无死地。
जन्मसँ मृत्युतक पहुँचैछ। जे जीवित रहैछ ओ दसमे सँ तीन भाग होइछ, जे मरैछ ओ दसमे सँ तीन भाग होइछ, आ जे जीबित रहैत मरि जाइछ ओहो दसमे सँ तीन भाग होइछ। एकर कारण की अछि? कियाके जे ओ लोग अपन जीबनके पालनमे अधिक आसक्त अछि। सुनल जाइछ जे जे जीबनके रक्षा करनाइ जानैछ, ओ जमीनपर चलैत हिंस्र पशुसँ नहि मिलैछ, युद्धमे हथियारसँ नहि घायल होइछ। बनभैल हाथी अपन सींग नहि मारि सकैछ, बाघ अपन पंजा नहि चला सकैछ, योद्धा अपन तलवारसँ किछु नहि करि सकैछ। एकर कारण की अछि? कियाके जे ओकर कोनो मृत्यु क्षेत्र नहि अछि।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे जीबन आ मृत्यु परस्पर जुड़ल अछि। दस भागमे सँ तीन भाग जीबित रहैछ, तीन भाग मरि जाइछ, आ तीन भाग स्वयं के मृत्यु क्षेत्रमे ले जाइछ। जे सच्चा जीबनके कला जानैछ, ओ हिंसासँ दूर रहैछ।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

हम प्रायः जीबन आ मृत्युके द्वैध मानैत छी। मुदा ई अध्याय हम के सिखाबैछ जे जे व्यक्ति जीबनकें आसक्तिसँ मुक्त करैछ, ओ मृत्युके भयसँ मुक्त होइछ।

आइ हम की करी?

आजि किछु कार्यसँ आसक्ति छोड़ू जे हम के तनाव दैछ। सरलतासँ जीबनके आनन्द लेबाक प्रयास करू।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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