देखू तँ नै दिखैत अछि जकर नाम अछि 'यान' (सपाट), सुनू तँ नै सुनाइत अछि जकर नाम अछि 'ही' (विरल), छुआ तँ नै छुआ सकैत अछि जकर नाम अछि 'वेई' (सूक्ष्म)। एतिना गोटाकें विस्तारसँ जांच नै कए सकैत, एइ सब एकठाम मिलि एक बनि गेल अछि। एकर ऊपर चमकदार नै अछि, एकर नीच्चा अँधेर नै अछि, अनंत धारासँ बहैत अछि जकर नाम नै राखि सकैत, पुनः अशून्यमय वस्तुमय वापस जा रहल अछि। एई कहल जाइत अछि रूपहीन रूप, वस्तुहीन आकृति, एई कहल जाइत अछि 'हुहुआंग' (धुंधला-धुंधला)। एकर सामना करू तँ पहिल नै दिखैत, पिछु करू तँ पिछु नै दिखैत। प्राचीन मार्गकें थामू, वर्तमानक वस्तुसभकें चलाउ। प्राचीनक आरंभ बुझि सकैत अछि एई कहल जाइत अछि ताओक विधि।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
ई अध्याय कहैत अछि जे ताओ देखैत नै दिखैत, सुनैत नै सुनाइत, छुआत नै छुआ सकैत अछि। ई सूक्ष्म, अदृश्य, आ अज्ञेय अछि। ई सब विचार, शब्द, आ छूअसँ परे अछि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
मैं सोचैत छी जे जीवनमे बहुत किछु अछि जे हमर संवेदी अनुभवसँ परे अछि। विज्ञानक सीमासभ, आध्यात्मिक सत्य, प्रेमक गहिराई सब एतिकें परे अछि। मैं अदृश्यकें सम्मान दिआवाकें सीखब।
आइ हम की करी?
आजुक दिन कोनो वस्तुकें केवल बाहरी दृष्टिकें नै बुझबाकें कोशिश करू। आंतरिक अनुभव, अंतर्ज्ञान, आ ध्यानसँ गहिराईमे जाएवाकें प्रयास करू।
We look at it, and we do not see it, and we name it 'the Equable.' We listen to it, and we do not hear it, and we name it 'the Inaudible.' We try to grasp it, and do not get hold of it, and we name it 'the Subtle.' This is called the Form of the Formless, and the Semblance of the Invisible; this is called the Fleeting and Indeterminable.
AI आधुनिक
देखू तँ नै दिखैत अछि जकर नाम अछि 'यान' (सपाट), सुनू तँ नै सुनाइत अछि जकर नाम अछि 'ही' (विरल), छुआ तँ नै छुआ सकैत अछि जकर नाम अछि 'वेई' (सूक्ष्म)। एतिना गोटाकें विस्तारसँ जांच नै कए सकैत, एइ सब एकठाम मिलि एक बनि गेल अछि। एकर ऊपर चमकदार नै अछि, एकर नीच्चा अँधेर नै अछि, अनंत धारासँ बहैत अछि जकर नाम नै राखि सकैत, पुनः अशून्यमय वस्तुमय वापस जा रहल अछि। एई कहल जाइत अछि रूपहीन रूप, वस्तुहीन आकृति, एई कहल जाइत अछि 'हुहुआंग' (धुंधला-धुंधला)। एकर सामना करू तँ पहिल नै दिखैत, पिछु करू तँ पिछु नै दिखैत। प्राचीन मार्गकें थामू, वर्तमानक वस्तुसभकें चलाउ। प्राचीनक आरंभ बुझि सकैत अछि एई कहल जाइत अछि ताओक विधि।
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?