ई अध्याय बतावै कि प्रजा के सेवा और परमात्मा के आराधना में संयम सबसे बड़ा गुण हवै। जे मनुष्य संयमी होवे, ऊ पहिलहीं से दूर देखे बाड़ो, गुन के राशि बटोरे बाड़ो, आ हर काम में सफलता पावे बाड़ो। ई संयम हवै जे देश के टिकाव होवे आ चिरकाल राज चले।
Key Concepts
啬
积德
深根
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 59, "संयम और गहराई", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/awa/chapters/59/
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प्रजा के सेवा और आसमान की आराधना में\nसंयम सबसे बड़ गुन हवै।\nजो संयम धारण करे,\nसो पहिलहीं से दूर देखे बाड़ो।\nपहिलहीं से दूर देखे बाड़ो,\nएकरा के गुन के राशि बढ़े बाड़ो।\nगुन के राशि बढ़े बाड़ी, तब कउनो काम असाध्य नाहिं।\nकउनो काम असाध्य नाहिं, तब हद नाहिंन पावे बाड़ो।\nहद नाहिंन पावे बाड़ो, तब राज्य मिले बाड़ो।\nराज्य के मूल मिले बाड़ो, तब चिरकाल राज होवे बाड़ो।\nएकरा के कहियो गहरा जड़ और गहरा थार,\nजिआए रही के मार्ग हवै।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय बतावै कि प्रजा के सेवा और परमात्मा के आराधना में संयम सबसे बड़ा गुण हवै। जे मनुष्य संयमी होवे, ऊ पहिलहीं से दूर देखे बाड़ो, गुन के राशि बटोरे बाड़ो, आ हर काम में सफलता पावे बाड़ो। ई संयम हवै जे देश के टिकाव होवे आ चिरकाल राज चले।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
मेर जीव में भी संयम के महत्व साफ दिखे बाड़ो। जब मैं खर्च में संयम राखे बानी, तब आर्थिक स्थिति अच्छा रही। जब बोल में संयम राखे बानी, तब संबंध अच्छा रही। जब खाई पिई में संयम राखे बानी, तब स्वास्थ्य अच्छा रही। संयम हमारा के मजबूत बनावे बाड़ो।
For regulating the human (in our constitution) and rendering the (proper) service to the heavenly, there is nothing like moderation. It is only by this moderation that there is effected an early return (to man's normal state). He who possesses the mother of the state may continue long.
AI Modern
प्रजा के सेवा और आसमान की आराधना में\nसंयम सबसे बड़ गुन हवै।\nजो संयम धारण करे,\nसो पहिलहीं से दूर देखे बाड़ो।\nपहिलहीं से दूर देखे बाड़ो,\nएकरा के गुन के राशि बढ़े बाड़ो।\nगुन के राशि बढ़े बाड़ी, तब कउनो काम असाध्य नाहिं।\nकउनो काम असाध्य नाहिं, तब हद नाहिंन पावे बाड़ो।\nहद नाहिंन पावे बाड़ो, तब राज्य मिले बाड़ो।\nराज्य के मूल मिले बाड़ो, तब चिरकाल राज होवे बाड़ो।\nएकरा के कहियो गहरा जड़ और गहरा थार,\nजिआए रही के मार्ग हवै।
मेरा चिंतन
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?