अध्याय 50
जिये से मरवा ले जाई
Original
盖闻善摄生者,陆行不遇兕虎,入军不被甲兵。兕无所投其角,虎无所措其爪,兵无所容其刃。夫何故?以其无死地。
अनुवाद
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय जिये आउर मरवा के बारे में बतावेला। दस भाग में से नौ भाग लोग जियेला या मरेला या जिये के चाहत में मर जाला। बाकी जो जिये के रहस्य जानेला ओकरा कवच नाही चाहीं, हथियार नाही चाहीं - ओकरा कुछ नाही हो सकत। एकर कारण बा कि ओहि के मरवा वाला कुछ नाही बा।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
मई भी अक्सर जिये के बारे में चिंता करेला - काहे से जियेला, कइसे जियेला। बाकी ई अध्याय सिखावेला कि जब मन में भय नाही रही त पिंड काहे से बचावेला। जब मृत्यु के भय छोड़ दियल जाई त असली जिये के रास्ता खुल जाला।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज मृत्यु के भय पर विचार करे के चाहीं। ओकरा से डरना बंद करे के चाहीं आउर जिये के हर पल के कद्र करे के चाहीं। जब तक जियत बानी, खुश रहे के कोशिश करे के चाहीं।
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मेरा चिंतन
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