ई अध्याय बतावत हवे कि इज्जत आओर बेइज्जती दुनों हमनी के मन के डरावित करत हवे। देह के मोह हमनी के बड़की बेमारी हवे। जब हमनी के देह के चिंता ना रही, त इज्जत-ओ-बेइज्जती से कवन डर ना रही।
Key Concepts
宠辱
身
天下
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 13, "इज्जत-ओ-बेइज्जती से डरना", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/awa/chapters/13/
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इज्जत आओर बेइज्जती से मन चौंक जाला, बड़की बेमारी के जइसन देह के कीमती मानल जाला। इज्जत-ओ-बेइज्जती से चौंकना मानी काहे? इज्जत नीचे के बात हवे, पावल पर चौंकल जाला, गवावल पर भी चौंकल जाला, एही से कहिची इज्जत-ओ-बेइज्जती से चौंकना। बड़की बेमारी के देह जइसन कीमती मानना मानी काहे? हमनी के बड़की बेमारी एही से हवे कि हमनी के देह हवे, जे दिन हमनी के देह ना होई, त हमनी के कवन बेमारी होई? एही से जे देह के जइसन संसार के कीमती मानई, ऊ संसार के सौंपल जा सकई; आओर जे देह के जइसन संसार से पियार करई, ऊ संसार के भरोसा दे सकई।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय बतावत हवे कि इज्जत आओर बेइज्जती दुनों हमनी के मन के डरावित करत हवे। देह के मोह हमनी के बड़की बेमारी हवे। जब हमनी के देह के चिंता ना रही, त इज्जत-ओ-बेइज्जती से कवन डर ना रही।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हमनी के जीवन में दूसरन के कहल-सुनल, इज्जत-बेइज्जती हमनी के मन के बहुत परेशान करत हवे। लोग के बिचार में रहल से आत्मसम्मान डगमगावत हवे। ई अध्याय हमनी के समझावत हवे कि बाहर के इज्जत के बजाय भीतर के शांति के देखल जाय।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज जब कोयन मन के इज्जत देवे या बेइज्जती करे, त कुछ ना कहल-सुनल, बस गहिरी सांस ले के भीतर के शांति के महसूस करल जाय।
Favour and disgrace would seem equally to be feared; honour and great calamity, to be regarded as personal conditions (of the same kind). Therefore he who would administer the kingdom, honouring it as he honours his own person, may be employed to govern it, and he who would administer it with the love which he bears to his own person may be entrusted with it.
AI Modern
इज्जत आओर बेइज्जती से मन चौंक जाला, बड़की बेमारी के जइसन देह के कीमती मानल जाला। इज्जत-ओ-बेइज्जती से चौंकना मानी काहे? इज्जत नीचे के बात हवे, पावल पर चौंकल जाला, गवावल पर भी चौंकल जाला, एही से कहिची इज्जत-ओ-बेइज्जती से चौंकना। बड़की बेमारी के देह जइसन कीमती मानना मानी काहे? हमनी के बड़की बेमारी एही से हवे कि हमनी के देह हवे, जे दिन हमनी के देह ना होई, त हमनी के कवन बेमारी होई? एही से जे देह के जइसन संसार के कीमती मानई, ऊ संसार के सौंपल जा सकई; आओर जे देह के जइसन संसार से पियार करई, ऊ संसार के भरोसा दे सकई।
मेरा चिंतन
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?