अध्याय 48

सीखने में प्रतिदिन वृद्धि

Quick Answer

यह अध्याय बताता है कि सांसारिक ज्ञान बढ़ाने से अहंकार बढ़ता है, जबकि आध्यात्मिक मार्ग पर चलने से हम अनावश्यक चीज़ों को छोड़ते हैं। अंततः, अकर्मण्यता (स्वाभाविक क्रिया) ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

Key Concepts

  • 为学
  • 为道
  • वू-वेई (अकर्म)

Cite This Chapter

Laozi, Tao Te Ching, Chapter 48, "सीखने में प्रतिदिन वृद्धि", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/hi/chapters/48/

Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.

为学日益,为道日损。损之又损,以至于无为。无为而无不为。
取天下常以无事,及其有事,不足以取天下。
सीखने में प्रतिदिन वृद्धि होती है, मार्ग में प्रतिदिन कमी। कम करो, और कम करो, जब तक कि कुछ न बचे। जब कुछ नहीं किया जाता, तब सब कुछ हो जाता है। संसार को पाने के लिए हमेशा अकर्मण्यता चाहिए। जब कर्म होता है, तो संसार को पाना असंभव है।

गहन चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

यह अध्याय बताता है कि सांसारिक ज्ञान बढ़ाने से अहंकार बढ़ता है, जबकि आध्यात्मिक मार्ग पर चलने से हम अनावश्यक चीज़ों को छोड़ते हैं। अंततः, अकर्मण्यता (स्वाभाविक क्रिया) ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

इसका मुझसे क्या संबंध है?

मैं अक्सर सोचता हूँ कि अधिक सीखना और अधिक करना ही सफलता का मार्ग है, लेकिन यह अध्याय मुझे सिखाता है कि छोड़ना और सरल होना ही सच्ची शक्ति है।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज, मैं एक ऐसी आदत या काम को छोड़ने का प्रयास करूँगा जो अनावश्यक है, और देखूँगा कि उस खालीपन में क्या नया आता है।

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मेरा चिंतन

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