प्रजा मरवा से ना डरई, त बिचार, मरवा से कइसे डरावा जाई? अगर प्रजा सदा मरवा से डरत रही, त जे बदमाश होई, हम ओकरा पकड़ के मार देई, अब कौन मारे के हिम्मत करई? सदा काहे के मारई बानी होई। जे बड़का लकड़हारा के काम अपने हाथ में लेई, बड़ा कम लोग आपन हाथ के घाव से बच पावत हन।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय कहत हन कि जब प्रजा मरवा से ना डरे, त ओकरा डरावना बेकार हुई जात हन। जब कवनो व्यवस्था खुद अपन काम करे के कोसिस करई, त हानि होई।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हमरा में से जब हम कवनो काम के जबरदस्ती से करावत बानी हन, त लोग ओकरा से दूर भागत हन। बिना समझइसा के, सजा देत रही का, मगर सजा से कवनो सुधार नइखे।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज हम कवनो प्रियजन से बिना डरइसा के बात करूं, समझूं कि ओकरा काहे के आचरण अइसन हुई। डरइसा नइखे बलुक प्यार से समुझाइसा करूं।
The people do not fear death; to what purpose is it to (try to) frighten them with death? If the people were always in awe of death, and I could always seize those who do wrong, and put them to death, who would dare to do wrong? There is always One who presides over the infliction of death.
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प्रजा मरवा से ना डरई, त बिचार, मरवा से कइसे डरावा जाई? अगर प्रजा सदा मरवा से डरत रही, त जे बदमाश होई, हम ओकरा पकड़ के मार देई, अब कौन मारे के हिम्मत करई? सदा काहे के मारई बानी होई। जे बड़का लकड़हारा के काम अपने हाथ में लेई, बड़ा कम लोग आपन हाथ के घाव से बच पावत हन।
मेरा चिंतन
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?