ई अध्याय कहत हों जे पुराणा जमाना में जे ताओ जाणत हों से लोगन कों चालाक न बणायौ, कुदरती बणायौ। लोग समझदारी लियौ तौं राज्य करणौ कठिन हों जाय। जो समझदारी न लियौ राज्य चलायौ जाय सो देश कों भलाई हों। गहरौ पुण्य वस्तुनि सों विपरीत हों, पर ता पछीं सीधौ मार्ग मिलत हों।
Key Concepts
愚
玄德
大顺
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 65, "पुराणा ताओ जाणणिया", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mwr/chapters/65/
Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.
पुराणा जमाना में जे ताओ जाणत हों, से लोगन कों चालाक न बणायौ, से कुदरती बणायौ। लोगन कों राज्य करणौ कठिन हों जेसौं, कैसेकि से बहुत समझदार हों गये।\n\nईसौं जो समझदारी लियौ राज्य चलायौ जाय, सो देश कों नुकसान हुओ। जो समझदारी न लियौ चलायौ जाय, सो देश कों लाभ हुओ। जे दोनों बातन जाणत हों, से शासन का ठिकाणौ जाण लियौ। जो सदा ठिकाणौ जाणत रहियौ, सो कहात हों गहरौ पुण्य।\n\nगहरौ पुण्य बहुत गूढ़ हों, बहुत दूर हों, पर वस्तुनि सों विपरीत हों, ता पछीं सीधौ मार्ग मिलत हों।
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
ई अध्याय कहत हों जे पुराणा जमाना में जे ताओ जाणत हों से लोगन कों चालाक न बणायौ, कुदरती बणायौ। लोग समझदारी लियौ तौं राज्य करणौ कठिन हों जाय। जो समझदारी न लियौ राज्य चलायौ जाय सो देश कों भलाई हों। गहरौ पुण्य वस्तुनि सों विपरीत हों, पर ता पछीं सीधौ मार्ग मिलत हों।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
म्हारे जीवन में भी ई बात लागू हों। म्हें बच्चन कों चालाक बणाणौ चाहियौ जे बहुत समझदार हों, पर ई म्हें लगत हों जे सरलता में ही सच्ची शक्ति हों। आज म्हें समझ आयो जे जे ज्यादा समझदारी दिखावत हों, सो कमजोर हों।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज म्हारे परिवार में कोई बच्चौ या जवान हों, तेन्हें सरलता सिखायौ। कोई जटिल उपाय निकालणौ नाहीं, बस प्रेम सों कुदरती बणायौ। जे चालाकी सों बणायौ तौं हानि हुओ।
The ancients who showed their skill in practising the Tao did so, not to enlighten the people, but rather to make them simple and ignorant. The difficulty in governing the people arises from their having much knowledge. He who (tries to) govern a state by his wisdom is a scourge to it; while he who does not (try to) do so is a blessing.
AI Modern
पुराणा जमाना में जे ताओ जाणत हों, से लोगन कों चालाक न बणायौ, से कुदरती बणायौ। लोगन कों राज्य करणौ कठिन हों जेसौं, कैसेकि से बहुत समझदार हों गये।\n\nईसौं जो समझदारी लियौ राज्य चलायौ जाय, सो देश कों नुकसान हुओ। जो समझदारी न लियौ चलायौ जाय, सो देश कों लाभ हुओ। जे दोनों बातन जाणत हों, से शासन का ठिकाणौ जाण लियौ। जो सदा ठिकाणौ जाणत रहियौ, सो कहात हों गहरौ पुण्य।\n\nगहरौ पुण्य बहुत गूढ़ हों, बहुत दूर हों, पर वस्तुनि सों विपरीत हों, ता पछीं सीधौ मार्ग मिलत हों।
म्हारो विचार
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?